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Rajasthani new shayri marwadi shayri rajasthani sad shayri hindi sad shayri
सावणियो सुरंगों बीत गयो फीको रह गया पिवजी तीज रो त्यौहारझिरमीर झिरमिर मेंहो बरसे पिवजी चाले ठंडी पवन बहारहूक सी उठे कालजीए जीवडो तड़फे पिवजी नैणां बरसे नीरकदे तो सोच ले बैरी बालमा घर उडीके थारी घर नार
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